भोर में हो भीत एक तारिका जो घर चली,बूँद ओस की धरा के पन्थ पर उसे मिली ।
बोली तारिका अरी अभागी कहाँ जा रही,भानु की किरन तुझे अभी जलाने आ रही ।
बूँद ने कहा कि मुझे मौत का न डर ज़रा,मौत ज़िंदगी का खेल है मेरी परम्परा ।
मृत्यु भय से यदि गगन की राह छोड़ जाऊँगी;कैसे प्रिय समुद्र के मैं अंक में समाऊँगी ।
भानु की किरण मुझे मिटा मिटा के थक गयी,प्रिय मिलन की प्यास किन्तु बढ़ रही नयी नयी ।
देखना है जीत किसकी और किसकी हार है,उसके साथ आग है तो मेरे साथ प्यार है ।
सुनके बात बूँद की ये तारिका लजा गयी,भेद प्रीति रीति का निराला आज पा गयी ।
किन्तु भेद मात्र जान लेना और बात है,प्रीति की डगर में जान देना और बात है ।
आज तक भी तारिका न प्रेम पथ पे जा सकी,भोर में न चन्द्रमा का साथ वह निभा सकी ।।
bhor mein ho bheet ek tārikā jo ghar chalī,boond os kī dharā ke panth par use milī.
bolī tārikā arī abhāgī kahān jā rahī,bhānu kī kiran tujhe abhī jalāne ā rahī.
boond ne kahā ki mujhe maut kā na ḍar zarā,maut zindagī kā khel hai merī paramparā.
dekhnā hai jīt kiskī aur kiskī hār hai,uske sāth āg hai to mere sāth pyār hai.
पहले चार बन्द; शेष का लिप्यन्तरण प्रतीक्षित।
In English
At daybreak a frightened star turns homeward and meets a drop of dew on the road of the earth; the star warns her that the sun's first ray is coming to burn her off.
The drop answers that death is an old game in her family: if she leaves the sky's road out of fear she will never reach the sea. The star carries fire — the drop carries love.