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Poems & works

अति सूधो सनेह को मारग है प्रेम का रास्ता सीधा है — इतना सीधा कि उसमें चतुराई की कोई गुंजाइश नहीं। रीति-परम्परा के बीच खड़ी एक रीति-मुक्त घोषणा। बिहारी सतसई — चुने हुए दोहे बिहारी के दोहे में जितना कहा जाता है, उससे अधिक संकेत में छूटता है — यही उनकी «नाविक के तीर» वाली मार… वृक्षवल्ली आम्हा सोयरी पेड़-लताएँ ही सगे-सम्बन्धी हैं, पक्षी ही स्वजन — तुकाराम का सबसे गाया जाने वाला अभंग, जिसमें एकान्त कोई त्याग नहीं, एक सुख… मानुष हौं तो वही रसखानि अगला जन्म किसी भी योनि में हो — कवि की शर्त एक ही है कि वह ब्रज में हो। रसखान का सबसे… रहीम के दोहे रहीम का नीति-बोध चित्रों में चलता है — टूटा धागा, मोतियों की माला, सुई और तलवार। उपदेश कहीं नहीं, दृष्टान्त हर जगह। हनुमान चालीसा — आरम्भ उत्तर भारत की सबसे अधिक कण्ठस्थ रचना। आरम्भ के दो दोहे कवि की विनय हैं, और उसके बाद चालीस चौपाइयाँ आरम्भ होती… रामचरितमानस — मंगलाचरण मानस की पहली चौपाइयाँ गुरु के चरण-रज को औषधि कहती हैं — और उसी क्रम से पूरी कथा आरम्भ होती है। पद्मावत — स्तुति खण्ड पद्मावत का आरम्भ एक कर्ता के स्मरण से होता है, फिर सृष्टि की गिनती — और उसी क्रम में कवि अपनी कथा… मेरे तो गिरधर गोपाल घर, कुल और लोक-लाज छोड़ने का घोषणा-पत्र। पद की टेक ही उसका तर्क है — दूसरा कोई नहीं। पायो जी मैंने राम रतन धन पायो सतगुरु से मिली अमोलक वस्तु का पद — जिसे न चोर ले जा सकता है, न ख़र्च से घटती है।