Poems & works
વૈષ્ણવ જન તો
वैष्णव कौन है — इसका उत्तर पूजा से नहीं, आचरण से दिया गया पद। इसीलिए यह भजन एक धार्मिक पद से आगे…
ਜਪੁਜੀ ਸਾਹਿਬ — ਮੂਲ ਮੰਤਰ
गुरु ग्रन्थ साहिब का पहला वाक्य — एक ही पंक्ति में ईश्वर के लिए नौ विशेषण, और उसके बाद काल पर टिका…
मोको कहाँ ढूँढ़े बन्दे
तीर्थ, मूर्ति और कर्मकाण्ड को एक-एक कर नकारता हुआ पद, जिसकी टेक हर बार वहीं लौटती है — मैं तो तेरे पास…
साखी — चुने हुए दोहे
कबीर की साखियाँ — दो पंक्तियों में एक पूरा तर्क। यहाँ पाँच सबसे प्रचलित दोहे, जिनमें आत्म-परीक्षा, स्मरण, प्रेम और वाणी का…
माधव, बहुत मिनति करि तोय
विद्यापति का सबसे गाया जाने वाला विनय-पद। तुलसी और तिल देकर भक्त अपनी देह समर्पित करता है और केवल एक बात माँगता…
ಉಳ್ಳವರು ಶಿವಾಲಯವ ಮಾಡುವರು
सबसे प्रसिद्ध वचन — धनी पत्थर के मन्दिर बनाते हैं, निर्धन के पास अपनी देह है। स्थावर मिटेगा, जंगम नहीं।
गीतगोविन्दम् — वसन्तरास
वसन्त का वर्णन और उसमें विहार करते हरि — गीतगोविन्द की सबसे गायी जाने वाली अष्टपदी की टेक यहीं बनती है।
नीतिशतकम् — साहित्यसंगीत
कला के बिना मनुष्य क्या है — भर्तृहरि का उत्तर तीखा है, और इसी तीखेपन ने इस श्लोक को सूक्ति बना दिया।
मेघदूतम् — प्रथम श्लोक
शापित यक्ष रामगिरि के आश्रमों में निर्वासित है। पहला ही श्लोक पूरी कथा की स्थिति रख देता है — कर्तव्य से चूका…
திருக்குறள் — கல்வி
सीखने पर लिखा सबसे उद्धृत कुरल — जो सीखो, निर्दोष सीखो; और सीखने के बाद उसी के अनुसार चलो।
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