बिहारी सतसई — चुने हुए दोहे
दोहा · रीतिकाल · सतसई
रीतिकाल का सबसे सघन कवि। सात सौ दोहों में श्रृंगार, भक्ति और नीति — हर दोहा अपने आप में एक पूरी कथा, इसीलिए कहा गया कि इनमें «नाविक के तीर» जैसी मार है।
What each poem carries is shown on its row — nothing is promised that is not there.
दोहा · रीतिकाल · सतसई
Who this poet read, who read this poet, and who was writing alongside.