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Poet in the archive

घनानन्द

Ghananand · c. 1673–1760

दिल्ली / वृन्दावन · रीतिमुक्त धारा

रीतिमुक्त ब्रजभाषा प्रेम · वियोग
1673जन्म 18शताब्दी 1सुजान 20+कृतियाँ

रीतिकाल के भीतर रीति से मुक्त कवि। प्रेम यहाँ अलंकार नहीं, एक सीधा और जोखिम भरा रास्ता है — «अति सूधो सनेह को मारग है»।

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सुजान हित Sujan Hit कवित्त-संग्रह