Poetic form: <span>गीत</span>
बूँद ने कहा
तारिका और ओस की बूँद का संवाद — भय के विरुद्ध प्रेम का पक्ष। अन्तिम पंक्तियाँ जानने और जीने का अन्तर बताती…
दर्द बैठा कुण्डली मारे
छल और स्वार्थ से भरे समय में ठहरी हुई पीड़ा का गीत। टेक हर बन्द के बाद लौटकर उसी वेदना पर लौट…
पता नहीं क्या सोच सुधाकर रखा मेरा नाम
अपने ही नाम से प्रश्न — «सुधाकर» अर्थात् चन्द्रमा, और जीवन तमस में बीता। कवि का आत्म-सम्बोधन, टेक-सहित।