अति सूधो सनेह को मारग है
कवित्त · रीतिमुक्त · सुजान हित
रीतिकाल के भीतर रीति से मुक्त कवि। प्रेम यहाँ अलंकार नहीं, एक सीधा और जोखिम भरा रास्ता है — «अति सूधो सनेह को मारग है»।
What each poem carries is shown on its row — nothing is promised that is not there.
कवित्त · रीतिमुक्त · सुजान हित
Who this poet read, who read this poet, and who was writing alongside.