ਜਪੁਜੀ ਸਾਹਿਬ — ਮੂਲ ਮੰਤਰ
बाणी · आदि ग्रन्थ का आरम्भ
सन्त-परम्परा के भीतर एक नयी राह। «जपुजी» का आरम्भिक मूल मन्त्र एक ही साँस में ईश्वर को निराकार, निर्भय और अजन्मा कहता है — और वहीं से गुरु ग्रन्थ साहिब आरम्भ होता है।
What each poem carries is shown on its row — nothing is promised that is not there.
बाणी · आदि ग्रन्थ का आरम्भ
Who this poet read, who read this poet, and who was writing alongside.