दर्द बैठा कुण्डली मारे
गीत · टेक-सहित · बबूल के फूल
हिन्दी साहित्य में परास्नातक; राजस्थान के नवलगढ़ में अध्यापन किया। १९७० से साहित्य की विभिन्न विधाओं में सतत लेखन। कविता संग्रह «बबूल के फूल» प्रकाशित। साहित्यिकी, शेखावाटी बोध तथा स्वाध्याय पत्रिकाओं का सम्पादन किया।
What each poem carries is shown on its row — nothing is promised that is not there.
गीत · टेक-सहित · बबूल के फूल
गीत · आत्म-सम्बोधन · बबूल के फूल
Who this poet read, who read this poet, and who was writing alongside.